gayatri mandir baoigraphy

गायत्री शिशु/विद्या मंदिर , चंद्री

चक्रधरपुर प्रखंड के अंतर्गत एक छोटा सा गाँव चंद्री, जहाँ गायत्री मंदिर की स्थापना सन 1996 ई ० में हुई। मंदिर में एक पुस निर्मित छोटा सा यज्ञशाला का निर्माण किया गया। प्रतिदिन नियमित रूप से हवन-पूजन का कार्य चलता था। तभी एक दिन स्वर्गीय विरंची महतो जी एवं रतिकांत महतो जी के मन में एक विचार आया कि यहाँ  एक शिशु मंदिर चलाया जाय, जिसमे बच्चों को हमारे भारतीय संस्कृति, संस्कार से सम्बंधित शिक्षा दी जाय। इस कारण एक बैठक की गई। जिसमे आस-पास के सात गाँवों के गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया। जिसमे सबों ने अपनी सहमति प्रदान किये। फिर विद्यालय का स्थापना :- 01-04-2003  को किया गया। जिसकी शुरुआत यज्ञशाला में चार बच्चों  से हुई। एक आचार्या को नियुक्त किया गया। मानधन देने के लिए विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमान रतिकांत महतो की धर्म पत्नी श्रीमती हेमंती देवी का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने आचार्या को मानधन देने के लिए घर-घर जा कर सब्जियाँ बेचने का काम की। धीरे-धीरे बच्चों  की संख्या बढ़ी। विद्यालय के प्रधानाचार्य रतिकांत जी समय निकाल  कर गांव-गांव जाकर अभिभावकों से मिलते और बच्चों को शिशु मंदिर में नामांकन कराने  के लिए आग्रह करते। समाज के 102 परिवारों  के सहयोग से पहला भवन (छत) 28 फीट x 13 फीट का  निर्माण 2005 को हुआ। विद्यालय समिति एवं समाज के सहयोग से 2015 में 3 कमरा और 2018 में 2 कमरा एवं 1 कार्यालय का निर्माण हुआ। विद्यालय के नाम से 2018 में  84 डिसमिल जमीन खरीदा गया। वर्तमान विद्यालय में कक्षा प्रवेश से अष्टम तक की कक्षाएं चल रही हैं। विगत 3 वर्ष तक कक्षा दशम तक चली थी, जिसमे मैट्रिक की परीक्षा में 100 % बच्चे उत्तीर्ण हुए। इस विद्यालय के बच्चे विभिन्न प्रतियोगिता में भाग लेकर विद्यालय का नाम रोशन किये। 2 बच्चे सेवाधाम की परीक्षा में पास कर सेवाधाम मंडोली, दिल्ली में अध्ययनरत हैं। इस प्रकार यह विद्यालय अभी भी चल रहा है। इस वर्ष के लॉक डाउन में भी सुदूर गाँव में     भी   ऑनलाइन  कक्षाएं चल रही है।                                                                                                          
                             क्रमशः।
                                                धन्यवाद 

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